उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच इन दिनों दिलचस्प बैलून युद्ध छिड़ा हुआ है. उत्तर कोरिया गुब्बारों में गोबर, सिगरेट के टुकड़े, फालतू कागज सहित अन्य कचरा भरकर दक्षिण कोरिया भेज रहा है तो दक्षिण कोरिया पर्चे, यूएसबी स्टिक, लाउड स्पीकर आदि भेज रहा है, जिन्हें उत्तर कोरिया की सरकार राजनीतिक कूड़ा कहती है. ध्यान रहे कि उत्तर और दक्षिण कोरिया कभी एक ही देश थे, जो कई दशक पहले टूट कर दो बने, जैसे दुनिया के कई अन्य देश बने हैं. कहते हैं अगर मिल-जुलकर रहें तो भाई से बढ़कर कोई दोस्त नहीं होता और दुश्मनी पर उतर आएं तो भाई से बढ़कर कोई दुश्मन भी नहीं होता! उत्तर और दक्षिण कोरिया भी ऐसे ही दुश्मन हैं, जो कभी भाई-भाई थे. दुश्मनी भी ऐसी कि परमाणु हथियार बनाने की होड़ में उत्तर कोरिया कंगाल ही हो गया! गनीमत है कि परमाणु हथियारों की धमकी से मामला अब नीचे उतर कर कचरे भेजने तक आ गया है. यह भी कम राहत की बात नहीं है कि दोनों देशों द्वारा भेजे गए गुब्बारों में अभी तक कोई खतरनाक पदार्थ नहीं मिला है. कहते हैं अपना खून आखिर अपना ही होता है. तो क्या दोनों देशों के निवासियों में अभी भी अपनत्व की भावना कह...