अपराधी से नहीं जनाब, अब प्रतिष्ठित लोगों से डर लगता है !
दुनिया में अपराध प्राचीनकाल से ही होते रहे हैं और अपराधियों को दंडित भी किया जाता रहा है. लेकिन पूरी मानव जाति के इतिहास में शायद हम पहली बार एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां खौफनाक अपराध ऐसे लोग कर रहे हैं जिनका पहले से कोई आपराधिक रिकाॅर्ड नहीं है. इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की यादें अभी भी धुंधली नहीं पड़ी हैं (जांच में पुलिस की चूक से आरोपी को जमानत मिल जाने से लोग एक बार फिर सन्न रह गए हैं), कि पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड ने एक बार फिर समूचे सभ्य समाज को हिलाकर रख दिया है. ये दोनों हाईप्रोफाइल मामले बहुचर्चित हुए, लेकिन अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि इस तरह की ढेरों घटनाएं इन दिनों सामने आ रही हैं, जिनमें अपराध ऐसे लोग कर रहे हैं जो पेशेवर अपराधी नहीं हैं. बाहर से शांत दिखने वाले लोग भीतर से कितना उबल रहे हैं, इसका कोई अनुमान भी नहीं लगा सकता. मुंबई लोकल के एक फर्स्ट क्लास डिब्बे में भारी बारिश के दौरान सिर्फ दरवाजा बंद करने को लेकर हुई बहस में एक व्यक्ति ने दूसरे की चाकू मारकर हत्या कर दी. नवी मुंबई के एक सरकारी आंगनवाड़ी केंद्र में एक बच्ची की बुरी त...