Posts

...सदा मगर मन रहना जी

पहले मुझको कुछ बातों या कुछ लोगों पर गुस्सा आ जाया करता था मैं बातें करके बंद उन्हें गुस्सा दिखलाया करता था पर लगा बाद में, जीवन चार दिनों का है गुस्से में ही यदि काट दिया क्या खाक इसे जी पाऊंगा! इसलिये जहां जो जैसा है वैसा ही कर स्वीकार उसे खुश रहने की कोशिश करता हर हालत में डर लगता है बातें मनवाने की अपनी जिद में यदि सबकुछ तहस-नहस कर डालूंगा तो मुझमें और डोनाल्ड ट्रम्प में फर्क कहां रह जायेगा! रचनाकाल : 4अप्रैल 2026

रफ्तार

यूं तो बदलाव हमेशा ही हुआ करते थे जिंदगी एक जगह पर न ठिठकती थी कभी किंतु होने में नया पीढ़ियां लग जाती थीं द्वंद्व चलता था नये और पुराने में ही। हो गई है मगर रफ्तार तेज अब इतनी कुछ दिनों में ही बदल जाती है सारी दुनिया खुद की नजरों में पराये हुए हम जाते हैं अपने ही आप को पहचान नहीं पाते हैं! जिंदगी पहले बहुत सुस्त लगा करती थी गति बढ़ी जब तो हुआ तन-मन रोमांचित, पर अब डराने ही लगी है बहुत भीषण रफ्तार हादसों का सदा अंदेशा बना रहता है! रचनाकाल : 31 मार्च 2026

ढोंगी बाबा से जब नेता मिलें, ‘करेला नीम चढ़ा’ हो जाता है !

Image
 पुरानी पीढ़ी के लोगों ने अपने बचपन में मेलों-ठेलों के दौरान अक्सर ही किसी मदारी और जादू जानने वाले के बीच का खेल देखा होगा. दोनों ही अपनी पूरी ताकत से एक-दूसरे पर मंत्रों की शक्ति से प्रहार करते थे. लगभग आधे-पौन घंटे तक जोर-आजमाइश का यह खेल चलता रहता था और अंत में दर्शकों की तरफ से जो पैैसा मिलता, वह या तो दोनों के बीच बराबर बंट जाता या अधिक मार सहने और हारने का नाटक करने वाला अधिक पैसा लेता था. हमारे गांव के स्कूल में मास्टरी करने वाला व्यक्ति इस खेल में हमेशा मदारी से जीत जाता और दर्शकों से मिलने वाले पैसे में कोई हिस्सा भी नहीं लेता था, क्योंकि बदले में लोगों के बीच उसकी अच्छी-खासी साख जम जाती और इतवार-मंगलवार को सुबह-सुबह टोना झारने (उतारने) का उसका व्यवसाय दिनोंदिन चमकता जाता था. बहुत दिनों तक हम बच्चे उनके इस नाटक को सच मानते रहे थे, लेकिन एक बार दूसरे गांव में मेले के दौरान जब जादू जानने वाले एक व्यक्ति ने मदारी के सामने हारने का नाटक किया और बदले में मिलने वाले पैसों में आधा हिस्सा बंटा लिया तो अनायास ही जैसे सारा तिलिस्म टूट गया था.  पिछले दिनों कथित ज्योतिषी और पाखं...

मरने का तुक

अंत में राम जब सरयूजी में उतरे होंगे जैसे सीताजी समाई थीं धरा के भीतर राम भी जल में अतल लीन हुए जब होंगे जब हिमालय में बिना पीछे मुड़े, देखे बिना पाण्डवों ने सभी स्वेच्छा से तजा होगा तन व्याघ्र ने कृष्ण के जीवन का किया होगा अंत आजकल मन में मेरे दृश्य वही आते हैं। यूं तो लेते ही जनम मृत्यु भी तय होती है लोग कुछ उसको भी उत्सव की तरह लेते हैं किंतु जो हिस्से में आई है समय में मेरे युद्ध में खत्म ये दुनिया जो हुई जाती है अंत शालीन नहीं क्या जरा हो सकता था इतने कायर तो नहीं थे कि डरें मरने से किंतु मरने का कोई तुक भी तो हो सकता था! रचनाकाल : 27 मार्च 2026

हम जिन्हें मानते हैं असभ्य या सभ्य, हकीकत कहीं उलट तो नहीं !

Image
 हाल ही में एक रिसर्च सामने आई कि चींटियां आपरेशन और इलाज करना जानती हैं. चोट से संक्रमण न फैले, इसलिए अफ्रीका की कैम्पोनोटस और मैकुलेटम चींटियां अपनी घायल साथियों का पैर काटकर उनकी जान बचाती हैं. जर्मनी की बुर्जबर्ग यूनिवर्सिटी के एरिक फ्रैंक ने अपने शोध में पाया कि मेगापोनेरा एनालिस चींटियां घायल साथियों के घाव पर एक विशेष प्रकार का तरल पदार्थ लगाती हैं, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना 30 से बढ़कर 80 प्रतिशत हो जाती है. अध्ययन से पता चला कि चींटियों का यह व्यवहार जन्मजात होता है, जो जटिल मेडिकल सिस्टम जैसा है.  कुत्ते-बिल्लियों को हम कभी-कभी घास खाते देखते हैं और बहुत से लोगों को पता होगा कि वे अपने पाचन तंत्र को दुरुस्त करने के लिए ऐसा करते हैं. अफ्रीकी हाथी गठिया के दर्द को कम करने के लिए एक विशेष पेड़ की छाल चबाते हैं. चींटी और दीमक की कई प्रजातियां संक्रमण फैलने पर संक्रमित साथी को झुंड से अलग कर देती हैं. कई जानवर बीमार पड़ने पर खाना छोड़ देते हैं और तब तक आराम करते हैं जब तक वे स्वस्थ न हो जाएं. हम मनुष्य लेकिन क्यों नहीं जान पाते कि हमारे शरीर के भीतर क्या चल रहा है?...

बड़ी बुराई के आगे छोटी भी अच्छी लगने लगती है!

Image
शर्माजी एक आम आदमी हैं. पिछले दिनों उनके स्मार्टफोन में व्हाट्‌सएप्प पर वेडिंग कार्ड का एक लिंक आया. चूंकि मैसेज किसी परिचित का था, इसलिए यह जानने की जिज्ञासा में उन्होंने लिंक पर क्लिक किया कि किसकी शादी  है. लेकिन क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो गया. दूसरे फोन से उन्होंने तत्काल अपने परिचित से पूछताछ की तो पता चला कि उन्होंने तो ऐसा कोई लिंक भेजा ही नहीं! दरअसल हैकरों ने उक्त परिचित के फोन को ऐसा ही वेडिंग कार्ड भेजकर हैक कर लिया था और उनकी कांटैक्ट लिस्ट में दर्ज सारे नंबरों पर वह वेडिंग कार्ड रूपी मालवेयर भेज दिया था. आनन-फानन में शर्माजी ने अपने स्मार्टफोन को फैक्टरी रिसेट किया और धोखाधड़ी का शिकार होने से बचे.  दूसरी घटना में एक बार किसी ने उनको फोन करके बड़े प्यार से पूछा कि कैसे हो भाई साहब! मुझे पहचाना? उन्होंने जब इंकार किया तो वह कहने लगा कि क्या भाई, मुझे नहीं पहचान रहे! आप कोशिश तो करो. अब शर्माजी हैरान! अटकलें लगाते हुए उन्होंने एक परिचित का नाम लिया तो उस बंदे ने तपाक से कहा कि अरे हां वही तो हूं मैं! दरअसल मेरा यूपीआई काम नहीं कर रहा है, इसलिए अभी आपको कोई साढ़े अठ...

जंगली बनता आदमी

मुझको डर तो दु:खों का नहीं था कभी आपदाओं की खातिर भी तैयार था चाहे जितना भी बन जाए जीवन कठिन सबको स्वेच्छा से सह लेना स्वीकार था किंतु जीना अधम इतना इंसान बन मुझसे हो ही नहीं पा रहा है सहन हो अगर कोई ईश्वर तो है बस यही प्रार्थना या तो सद्‌भाव से हम मनुष्यों को जीने का वरदान दो अन्यथा खत्म दुनिया से हमको करो जंगली जानवर पेट भर जाए तो मारते फिर नहीं आदमी जंगली किंतु बन जाए तो खत्म दुनिया ही ये हो न जाए कहीं! (रचनाकाल : 14 मार्च 2026)