ये कहां आ गए हम, उल्टी दिशा में चल के !
पिछले दिनों उत्तरप्रदेश के बिजनौर में साइबर अपराधियों ने एक महिला को दस दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर इतना डराया-धमकाया कि शादी की सालगिरह से एक दिन पहले उसने फांसी लगाकर जान दे दी. अंतिम संस्कार के समय साइबर ठग का फोन आने पर परिजनों को शक हुआ, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ. महिला के मोबाइल में पांच नंबरों से धमकी वाले मैसेज मिले. इस खुलासे के बाद जब महिला के कमरे की छानबीन की गई तो एक डायरी में सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने एक लड़के द्वारा परेशान करने और ब्लैकमेल करने की बातें लिखी थीं. डिजिटल अरेस्ट का यह मामला नया नहीं है, इन दिनों इस तरह की खबरों से अखबार रंगे रहते हैं. सरकारों और सामाजिक संगठनों की ओर से इस बारे में जनजागृति की जा रही है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती, इसलिए ऐसे साइबर ठगों के चंगुल में नागरिक न फंसें. जो अभी तक नहीं फंसे हैं उन्हें ताज्जुब भी होता है कि आज के जमाने में कोई इतना बेवकूफ कैसे हो सकता है! लेकिन हकीकत यह है कि खूब पढ़े-लिखे और समझदार लोग भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के झांसे में आ रहे हैं. ऐसा आखिर क्यों हो रहा है? दरअसल कोई भी ...