खरे सिक्कों को चुकानी पड़ती है खोटे सिक्कों की कीमत !
पिछले दिनों पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने दावा किया कि गिरफ्तार संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद ऑपरेटिव हमीम मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में पुलिस की वर्दी पहन कर घुसपैठ और तोड़फोड़ की साजिश रची थी. जाहिर है कि हमीम का मकसद पुलिस की वर्दी को बदनाम करना था. लेकिन असामाजिक तत्व सिर्फ पुलिस की वर्दी का ही इस्तेमाल नहीं कर रहे. जेन-जी के दुनियाभर में हो रहे आंदोलनों में भी घुसकर वे तोड़फोड़ मचाते हुए हिंसा कर रहे हैं. नेपाल में हुए जेन-जी के आंदोलन में जब संसद और सुप्रीम कोर्ट की इमारत जैसे संवैधानिक स्थलों को ढहा दिया गया तो बहुत से युवा सदमे में आ गए थे कि उनके आंदोलन ने यह क्या कर डाला! बांग्लादेश में भी छात्रों के आंदोलन को कट्टरपंथियों ने हड़प लिया था और छात्रों को लगता रहा कि उनके बीच के ही लोग यह सब कर रहे हैं. वर्तमान दौर के आंदोलनों की सबसे खतरनाक बात यही है कि आंदोलनकारी समझ ही नहीं पाते कि उनके सहयोगियों का वेश बनाकर असामाजिक तत्व भी आंदोलन में घुस आए हैं और उसका अपने निहित स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं. आंदोलन की अगुवाई करने वाले लोग असामाजिक तत्व...