ईमानदारी के अभाव में शातिर बन जाती है समझदारी
पश्चिम एशिया में जारी वैश्विक संकट के मद्देनजर, हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा मितव्ययिता की अपील के बाद किफायतशारी दिखाने की होड़ लग गई है. मुख्यमंत्रियों से लेकर राज्यपालों तक ने अपने काफिले में वाहन आधे कर दिए हैं. अधिकारियों को कार की बजाय मेट्रो-बस से यात्रा करने और होटलों की बजाय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठकें करने का आदेश जारी कर दिया गया है. नेताओं से विमान यात्रा टालने को कहा गया है (यह बात और है कि साइकिल या मोटरसाइकिल पर बैठकर फोटो खिंचाने वाले कुछ नेताओं के पीछे वाहनों का लम्बा काफिला नजर आता है). फिजूलखर्ची करने वालों द्वारा प्रधानमंत्री की अपील के बाद पैसे बचाने की मची होड़ को देखकर अचरज होता है कि जिन चीजों के बिना भी काम चल सकता था, आखिर अब तक चलाया क्यों नहीं जा रहा था! नेता अगर वाहनों का काफिला अपनी सुरक्षा के लिए लेकर चलते थे तो वह मुद्दा तो अभी भी बरकरार है, लेकिन काफिले में कटौती के बावजूद कहीं भी तो किसी नेता की जान कोई नहीं ले रहा! आपदाओं या संकटों की एक अच्छी बात यह होती है कि वे हमारे सुविधाभोगी जीवन को झकझोरते हुए, आत्ममंथन के लिए प्रेरित करते हैं. क...