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बच्चों को भुगतना पड़ता है बड़ों के पाखंड का खामियाजा

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 पिछले दिनों स्कूल में एक छोटे बच्चे को टीचर ने चांटा मारा और उसकी मौत हो गई. दिल्ली के एक कन्या विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा की मौत के मामले में आरोप है कि किताब नहीं लाने पर शिक्षिका ने उसे सजा दी थी. छत्रपति संभाजीनगर में पहाड़ की चोटी से कूदने वाले किशोर की तो देशभर में चर्चा हुई, जिसमें उसके माता-पिता की भी मौत हो गई थी. दो छात्र चोरी करने के लिए अपनी प्रिंसिपल के घर में घुसे और जाग जाने के कारण प्रिंसिपल को चाकुओं से गोद कर मार डाला.  आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि आज बच्चे इतने नाजुक होते जा रहे हैं कि एक चांटा भी नहीं सह पाते, इतने जिद्दी हो रहे हैं कि मांगें मनवाने के लिए अपनी जान तक दे देते हैं! या फिर इतने क्रूर हो रहे हैं कि किसी की जान लेने से भी नहीं हिचकते! आज की बुजुर्ग हो चुकी पीढ़ी में शायद बहुतों को अपने बचपन के वे दिन याद होंगे जब स्कूल में शिक्षकों की छड़ी के जोरदार प्रहार से बचने के लिए वे क्या-क्या तरीके नहीं खोजते रहते थे. एक बार एक बच्चे ने किसी बात पर अपनी मां को कुएं में कूद जाने की धमकी दे दी. परेशान मां ने दोपहर में खाना खाने घर आए पिता को यह बा...

अच्छाई में कमी

कुछ लोगों को बुरा समझकर मैंने उनकी निंदा की पर अच्छे निकले जब वे तो मैं लज्जा से गड़ गया स्वयं की नजरों में गिर गया बुराई शायद मेरे भीतर थी! इसलिये नहीं अब कभी किसी को करता हूं बदनाम  कि मेरी अगर धारणा साबित कभी गलत हुई तो क्या नहीं डूब कर मर जाऊंगा चुल्लू भर पानी में ही! सच तो यह है कोई भी इतना बुरा नहीं अच्छाई का प्रतिदान बुराई से जो दे यदि हमको ऐसा लगता है हम तो हरदम अच्छा करते पर बुरा हमारे साथ हमेशा होता है तो कमी हमारी अच्छाई में शायद है! रचनाकाल  : 6 सितंबर 2026

क्रिया-प्रतिक्रिया

है नियम प्रकृति का ही शायद  प्रत्येक क्रिया की होती है प्रतिक्रिया कि करता है जब कोई बुरा किसी का बुरा वक्त फिर उसका भी फिर आता है फिर क्यों विश्वास हमारा यह डिग जाता है अच्छाई का बदला न हमें मिल पायेगा! अच्छाई के बदले में भी यदि कोई करता बुरा दोष ईश्वर को देने लगते हम क्यों नहीं झांकते हैं भीतर  करने को आत्मनिरीक्षण यह अच्छाई में तो कहीं हमारे खोट नहीं! रचनाकाल  : 5-6 सितंबर 2026

दु:ख जड़, सुख फल

बांटता हूं लोगों को सुख जब तो लौटता है कई गुना होकर वह दूसरों के चेहरे पर देख खुशी मन मेरा और भी खुश होता है। दु:ख के भी साथ ऐसा होता है लगता है डर उसे बांटने में देख कर लोगों को दुःखी मेरा भी दुःख न बढ़े कई गुना इसीलिए सहता हूं चुपचाप  छिपाता हूं उसी तरह वृक्ष जैसे छिपाते हैं अपनी जड़ देते हैं लोगों को फूल-फल दुःख भी मुझे लगते अपनी जड़ों जैसे चाहता हूं रखूं उन्हें भीतर ही लोगों को बांट सकूं  ताकि खूब फूल-फल। रचनाकाल : 5 सितंबर 2026

गहरी नींद से झकझोर कर हमें जगाने के लिए आती हैं आपदाएं !

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 पिछले दिनों अचानक आई भयावह बाढ़ ने नेपाल को दहला दिया. बाढ़ का कारण हिमालय क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर और चट्टान का टूटना बताया जाता है. लेकिन ग्लेशियर यूं ही नहीं टूट गया. वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र के तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे ग्लेशियर कमजोर हो रहे हैं और इस तरह आपदाओं की आशंका बढ़ गई है. पिछले साल भारत में कई स्थानों पर फ्लैश फ्लड ने कहर ढाया था. तेरह साल पहले की केदारनाथ त्रासदी आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. ‘नासा साइंस’ जैसी वैज्ञानिक संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार हमारी पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे मौसम का चक्र पूरी तरह से बिगड़ चुका है. दुनिया के अधिकांश देशों में हाल के वर्ष सबसे गर्म दर्ज किए गए हैं. समुद्र का तापमान बढ़ने से हवा में नमी बढ़ी है जिससे अचानक बादल फटने और विनाशकारी बाढ़ आने की घटनाएं बढ़ गई हैं. दुनिया के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं तो कई सूखे से. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अमेजन के जंगलों में लगने वाली आग बेहद खतरनाक होती जा रही है तो अंटार्कटिक...

अलविदा

सूर्योदय में ही सिर्फ नहीं होता सौंदर्य डूबते सूरज की लालिमा की भी अपनी गरिमा होती है सिर्फ जन्म लेने की ही नहीं मनाई जातीं खुशियां आयु पूर्ण कर मरने वालों को भी धूमधाम से किया जाता है विदा। परिवर्तन ही नियम है सृष्टि का पुराना जाता है, तभी नया आता है किन्तु नया ही जब चला जाये तो कौन ले सकता है उसका स्थान? बहुत त्रासद होता है असमय जाना बहुत कठिन होता है किसी को बीच राह में ही कहना, अलविदा!!! hemdhar.blogspot.com रचनाकाल : 5 जून 2026

मुनाफाखोरों के शोषण से आम जनता को बचाए कौन ?

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 बच्चों में मोबाइल की लत लगने को लेकर बड़े अक्सर चिंता जाहिर करते हैं. कुछ माह या साल के बच्चों तक के मोबाइल एडिक्ट होने की चिंताजनक खबरें आती रही हैं. अब खुलासा हो रहा है कि ये अनायास नहीं है, सोशल मीडिया कंपनियों ने जानबूझ कर ऐसे फीचर बनाए हैं जो बच्चों को मोबाइल एडिक्ट बनाते हैं. अमेरिका के 29 राज्यों ने तो मेटा पर इसके लिए केस भी कर दिया है. उनका आरोप है कि इंस्टाग्राम व फेसबुक के लाइक, असीमित (या अनंत) स्क्राॅलिंग, ऑटो प्ले व नोटिफिकेशन बच्चों को ज्यादा देर एप्प इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किए गए हैं. सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों को पता होगा कि अनंत स्क्राॅलिंग में फीड खत्म ही नहीं होती, यानी कितना इस्तेमाल करना है, यह पता ही नहीं चलता.  कुछ माह पहले यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई थी कि जब आपके मोबाइल फोन की बैटरी ‘लो’ हो तो एप्प आधारित कोई सर्विस लेने पर ज्यादा पैसे कटते हैं, क्योंकि सर्विस प्रोवाइडर अंदाजा लगा लेते हैं कि बैटरी कम होने से आपके पास ज्यादा ऑप्शन बचे नहीं होंगे, यानी आप झख मारकर ज्यादा पैसे चुकाएंगे! यही नहीं, आईफोन के जरिये कोई सर्विस लेने पर, एंड्राॅइड ...