बच्चों को भुगतना पड़ता है बड़ों के पाखंड का खामियाजा
पिछले दिनों स्कूल में एक छोटे बच्चे को टीचर ने चांटा मारा और उसकी मौत हो गई. दिल्ली के एक कन्या विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा की मौत के मामले में आरोप है कि किताब नहीं लाने पर शिक्षिका ने उसे सजा दी थी. छत्रपति संभाजीनगर में पहाड़ की चोटी से कूदने वाले किशोर की तो देशभर में चर्चा हुई, जिसमें उसके माता-पिता की भी मौत हो गई थी. दो छात्र चोरी करने के लिए अपनी प्रिंसिपल के घर में घुसे और जाग जाने के कारण प्रिंसिपल को चाकुओं से गोद कर मार डाला. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि आज बच्चे इतने नाजुक होते जा रहे हैं कि एक चांटा भी नहीं सह पाते, इतने जिद्दी हो रहे हैं कि मांगें मनवाने के लिए अपनी जान तक दे देते हैं! या फिर इतने क्रूर हो रहे हैं कि किसी की जान लेने से भी नहीं हिचकते! आज की बुजुर्ग हो चुकी पीढ़ी में शायद बहुतों को अपने बचपन के वे दिन याद होंगे जब स्कूल में शिक्षकों की छड़ी के जोरदार प्रहार से बचने के लिए वे क्या-क्या तरीके नहीं खोजते रहते थे. एक बार एक बच्चे ने किसी बात पर अपनी मां को कुएं में कूद जाने की धमकी दे दी. परेशान मां ने दोपहर में खाना खाने घर आए पिता को यह बा...