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दुश्मन मेरे जैसा

दुश्मन की नजरों से खुद को देखा जब तो रह गया स्तब्ध यह देख कि चेहरा मेरा भी दुश्मन जैसा हू-ब-हू दिखाई पड़ता है! दुश्मन में जितनी मुझे बुराई दिखती है उसको भी मेरे भीतर उतनी दिखती है मैं खुद को जितना अच्छा माना करता हूं वह भी खुद को वैसा ही माना करता है! तो जितना मैं निर्दयी समझता था उसको क्या उतनी ही निर्दयता मेरे भीतर है मन का काला जितना उसको माना करता क्या मैं भी भीतर से उतना ही काला हूं! जब से देखा है अक्स स्वयं का दुश्मन में मैं कांप गया हूं मन ही मन गहराई तक अब वह भी मुझको अपने जैसा लगता है हे ईश्वर, मेरे दुश्मन की रक्षा करना! रचनाकाल : 15 अप्रैल 2026

जब भविष्य बता सकता है एआई तो हम क्यों नहीं रोक पाते तबाही ?

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 हाल ही में एक खबर सामने आई कि पार्किंसन रोग होने का समय रहते अनुमान लगाने के लिए अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित क्लिनिकल अध्ययन की शुरुआत की गई है, जिससे लाइलाज होने से पहले ही इस बीमारी की पहचान कर, उसका इलाज संभव हो सकेगा.  पार्किंसन ही नहीं, एआई ने सैकड़ों बीमारियों की, उनके लक्षण दिखाई देने के पहले ही पहचान करके उनके समय रहते इलाज को संभव बनाया है. दरअसल हर बीमारी दिखाई देने के बहुत पहले से ही अपनी आहट देना शुरू कर देती है और एल्गोरिद्‌म के जरिये एआई पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक रूप से अनुमान लगा सकता है कि किसी व्यक्ति को भविष्य में किस बीमारी का कितना खतरा है. स्वास्थ्य ही नहीं, अपराध रोकने के क्षेत्र में भी एआई बहुत मददगार साबित हो रहा है. ब्रिटेन की सरकार तो एक ऐसे एआई टूल पर काम कर रही है जो हत्या की घटना से पहले ही हत्यारे के बारे में भविष्यवाणी कर सकेगा. ‘मर्डर प्रिडिक्शन प्रोग्राम’ नाम का यह एआई पुलिस रिकाॅर्ड्‌स और सरकारी डाटा का इस्तेमाल करके अपराध होने के पहले ही उसकी संभावना के बारे में जानकारी दे देगा, जिससे वारदात रोकने में मदद मिल ...

ये कहां आ गये हम!

जीने की खातिर जाने-अनजाने मुझसे गलतियां कई हो जाती थीं अपराधबोध से मन विनम्र हो जाता था हर जीव-जंतु से क्षमा प्रार्थी रहता था चर-अचर सभी प्राणी मुझको जो देते थे एहसानमंद हो उन्हें देवता कहता था आकस्मिक विपदा अगर कभी आ जाती थी प्रायश्चित उसको समझ सह लिया करता था। जाने कब लेकिन मैंने, जो कुछ मिलता है अधिकार उसे हम इंसानों का मान लिया जो स्वेच्छा से सब जीव-जंतु दे देते थे बलपूर्वक उनसे वह सब लेना शुरू किया मन से कृतज्ञता भाव पुराना विदा हुआ मैं धीरे-धीरे इतना ज्यादा क्रूर हुआ चर-अचर सभी को जीत, बंधुओं से ही अपने लड़ता हूं दुनिया जो स्वर्ग सरीखी थी, अब नर्क बनाया करता हूं!   रचनाकाल : 11-12 अप्रैल 2026

जो खुद को नायक कहता है, खलनायक से भी अधिक भयावह लगता है !

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 हममें से शायद बहुत से लोगों ने वह कहानी सुनी होगी कि एक चिड़िया बहुत मेहनत से अपना घोंसला बनाती लेकिन एक उत्पाती बंदर उसे उजाड़ देता था. बार-बार उजाड़ने के बाद भी चिड़िया ने जब घोंसला बनाना नहीं छोड़ा तो आखिरकार बंदर को अपने कृत्य पर शर्म आई, उसने चिड़िया की मदद करने की सोची. लेकिन बहुतेरी कोशिशों के बावजूद जब वह दो-चार तिनके भी सही ढंग से नहीं जोड़ पाया, तब उसे अहसास हुआ कि तोड़ना कितना सरल है और जोड़ना कितना कठिन!  इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच पिछले सवा महीने से जारी युद्ध में विनाशलीला जारी है. ईरान तो अपने अस्तित्व पर खतरा मंडराते देख मरने-मारने पर उतारू है ही, युद्ध लंबा खिंचने से बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी आखिरकार शांति दूत का अपना मुखौटा उतार फेंका है. ईरान की परमाणु क्षमता खत्म करने को युद्ध का मकसद बताने वाले ट्रम्प ने अब ईरान के पुलों को उड़ाना और बिजली केंद्रों को तबाह करना शुरू कर दिया है. उन्होंने नौ करोड़ की जनसंख्या वाले ईरान की पूरी सभ्यता को ही मटियामेट कर देने और पाषाण युग में धकेलने की धमकी दी है.  ट्रम्प को शायद यह सपने में भी अनु...

...सदा मगर मन रहना जी

पहले मुझको कुछ बातों या कुछ लोगों पर गुस्सा आ जाया करता था मैं बातें करके बंद उन्हें गुस्सा दिखलाया करता था पर लगा बाद में, जीवन चार दिनों का है गुस्से में ही यदि काट दिया क्या खाक इसे जी पाऊंगा! इसलिये जहां जो जैसा है वैसा ही कर स्वीकार उसे खुश रहने की कोशिश करता हर हालत में डर लगता है बातें मनवाने की अपनी जिद में यदि सबकुछ तहस-नहस कर डालूंगा तो मुझमें और डोनाल्ड ट्रम्प में फर्क कहां रह जायेगा! रचनाकाल : 4अप्रैल 2026

रफ्तार

यूं तो बदलाव हमेशा ही हुआ करते थे जिंदगी एक जगह पर न ठिठकती थी कभी किंतु होने में नया पीढ़ियां लग जाती थीं द्वंद्व चलता था नये और पुराने में ही। हो गई है मगर रफ्तार तेज अब इतनी कुछ दिनों में ही बदल जाती है सारी दुनिया खुद की नजरों में पराये हुए हम जाते हैं अपने ही आप को पहचान नहीं पाते हैं! जिंदगी पहले बहुत सुस्त लगा करती थी गति बढ़ी जब तो हुआ तन-मन रोमांचित, पर अब डराने ही लगी है बहुत भीषण रफ्तार हादसों का सदा अंदेशा बना रहता है! रचनाकाल : 31 मार्च 2026

ढोंगी बाबा से जब नेता मिलें, ‘करेला नीम चढ़ा’ हो जाता है !

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 पुरानी पीढ़ी के लोगों ने अपने बचपन में मेलों-ठेलों के दौरान अक्सर ही किसी मदारी और जादू जानने वाले के बीच का खेल देखा होगा. दोनों ही अपनी पूरी ताकत से एक-दूसरे पर मंत्रों की शक्ति से प्रहार करते थे. लगभग आधे-पौन घंटे तक जोर-आजमाइश का यह खेल चलता रहता था और अंत में दर्शकों की तरफ से जो पैैसा मिलता, वह या तो दोनों के बीच बराबर बंट जाता या अधिक मार सहने और हारने का नाटक करने वाला अधिक पैसा लेता था. हमारे गांव के स्कूल में मास्टरी करने वाला व्यक्ति इस खेल में हमेशा मदारी से जीत जाता और दर्शकों से मिलने वाले पैसे में कोई हिस्सा भी नहीं लेता था, क्योंकि बदले में लोगों के बीच उसकी अच्छी-खासी साख जम जाती और इतवार-मंगलवार को सुबह-सुबह टोना झारने (उतारने) का उसका व्यवसाय दिनोंदिन चमकता जाता था. बहुत दिनों तक हम बच्चे उनके इस नाटक को सच मानते रहे थे, लेकिन एक बार दूसरे गांव में मेले के दौरान जब जादू जानने वाले एक व्यक्ति ने मदारी के सामने हारने का नाटक किया और बदले में मिलने वाले पैसों में आधा हिस्सा बंटा लिया तो अनायास ही जैसे सारा तिलिस्म टूट गया था.  पिछले दिनों कथित ज्योतिषी और पाखं...