जीवन को जिससे बनना था आसान, उसी से डर क्यों लगता है ?
हाल ही में आईटी सेक्टर के शेयरों में जिस तरह से अचानक भारी गिरावट देखने को मिली, उससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर जताई जा रही आशंकाएं गहरा गई हैं. हालांकि बाजार की और विशेषज्ञों की चिंताएं अलग-अलग हैं लेकिन उनमें समानता यह है कि दोनों का स्वरूप डरावना है. विशेषज्ञ काफी समय से आशंका जताते रहे हैं कि एआई कहीं मनुष्यों के नियंत्रण से बाहर न निकल जाए. पिछले दिनों ‘मोल्टबुक’ नामक एक ऐसे प्लेटफाॅर्म की खबर आई जो एआई एजेंट्स (ऐसे उन्नत सॉफ्टवेयर प्रोग्राम जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के जटिल कार्यों को पूरा कर सकते हैं) के लिए बना है अर्थात जहां हजारों एआई एजेंट्स बातचीत करते हैं और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं. हम मनुष्य इस प्लेटफाॅर्म की गतिविधियों को सिर्फ दर्शक की तरह देख सकते हैं, उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते. चौंकाने वाली बात यह है कि ये एआई एजेंट्स हम इंसानों की तरह ही चुगलखोरी की कला में माहिर दिखे. वे अपने साथी एआई एजेंटों की नहीं बल्कि हम इंसानों की बुराई कर रहे थे. यही नहीं, उन्होंने आपस में बातचीत की एक ऐसी भाषा विकसित कर ली है जिसे इंसान समझ ही नहीं सकते. ह...