गहरी नींद से झकझोर कर हमें जगाने के लिए आती हैं आपदाएं !
पिछले दिनों अचानक आई भयावह बाढ़ ने नेपाल को दहला दिया. बाढ़ का कारण हिमालय क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर और चट्टान का टूटना बताया जाता है. लेकिन ग्लेशियर यूं ही नहीं टूट गया. वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र के तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे ग्लेशियर कमजोर हो रहे हैं और इस तरह आपदाओं की आशंका बढ़ गई है. पिछले साल भारत में कई स्थानों पर फ्लैश फ्लड ने कहर ढाया था. तेरह साल पहले की केदारनाथ त्रासदी आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. ‘नासा साइंस’ जैसी वैज्ञानिक संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार हमारी पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे मौसम का चक्र पूरी तरह से बिगड़ चुका है. दुनिया के अधिकांश देशों में हाल के वर्ष सबसे गर्म दर्ज किए गए हैं. समुद्र का तापमान बढ़ने से हवा में नमी बढ़ी है जिससे अचानक बादल फटने और विनाशकारी बाढ़ आने की घटनाएं बढ़ गई हैं. दुनिया के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं तो कई सूखे से. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अमेजन के जंगलों में लगने वाली आग बेहद खतरनाक होती जा रही है तो अंटार्कटिक...