जब अपने दुश्मन बनते हैं तो दुश्मन से भी अधिक भयानक होते हैं !
हाल ही में पांच राज्यों के हुए विधानसभा चुनावों की एक खासियत यह रही कि दो राज्यों के निर्वाचित होने वाले मुख्यमंत्रियों ने अपनी वर्तमान पार्टी को उसी राजनीतिक दल के खिलाफ जिताया, जिसमें वे कभी खुद शामिल थे. पश्चिम बंगाल में भाजपा के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अभी कुछ वर्ष पहले तक ममता बनर्जी के दाहिने हाथ माने जाते थे, जिन्हें हराकर अब वे मुख्यमंत्री बने है. इसी तरह असम में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले हिमंत बिस्वा सरमा भी भाजपा में शामिल होने के पहले तक कांग्रेस के उन्हीं राहुल गांधी के खासमखास थे, जिन पर वे दल बदलने के बाद तीखा हमला करने लगे हैं. अपनी मूल पार्टी का ही कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन जाने के ऐसे उदाहरणों की राजनीति में भरमार है. राजनीति ही नहीं, जीवन के प्राय: सभी क्षेत्रों में ऐसे ढेरों उदाहरण मिल जाएंगे जहां कभी घुल-मिल कर रहने वाले बाद में एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन गए. खेती या अन्य प्राॅपर्टी के विवाद में भाई द्वारा भाई की ही जान लेने या हमला करने की खबरें आए दिन पढ़ने-सुनने को मिलती हैं. मुगलकाल में तो सत्ता के लिए अपने सगे भाइयों को मौत के घाट...