बहादुरों की अहिंसा के अभाव में तबाह होती दुनिया
दुनिया इन दिनों भीषण युद्धों से कराह रही है. रूस-यूक्रेन और इजराइल-फिलिस्तीन के संघर्ष मानो कम थे कि अमेरिका-इजराइल ने ईरान को नेस्तनाबूद करने की ठान ली है. बदले में ईरान भी इजराइल और मिडिल ईस्ट के अमेरिकी ठिकानों पर जबर्दस्त पलटवार कर रहा है, जिससे यूरोपीय देशों के लिए अमेरिका का साथ देना मजबूरी बन गई है. इधर पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच संघर्ष भी तेज हो गया है. यह सच है कि दुनिया में युद्ध प्राचीन काल से ही होते रहे हैं. इतिहास के पन्ने युद्धों में शूरवीरता दिखाने वाले नायकों के महिमा-मंडन से भरे पड़े हैं. हालांकि अहिंसा का प्रतिपादन करने वाले बुद्ध और महावीर जैसे महामानव भी आज से ढाई हजार साल पहले ही हो चुके हैं, इसलिए यह तो नहीं कहा जा सकता कि मानव जाति को अहिंसा के महत्व की पूरी जानकारी ही नहीं थी, लेकिन अहिंसा के इन पुरोधाओं को भगवान मान कर पूजने के बावजूद हमने उनके सपनों के अहिंसक समाज के निर्माण में कितनी प्रगति की है? लगभग एक सदी पूर्व महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के जरिये व्यावहारिक जीवन में अहिंसा के कार्यान्वयन की कुछ हद तक सफल कोशिश की थी लेकिन वह सत्ता पक्ष के खि...