उधार की सोच कहीं कुंद तो नहीं कर डालेगी हमारा दिमाग !
हाल ही में सामने आई यह खबर बेहद चौंकाने वाली है कि आज के डिजिटल युग में लोग खुद सोचना तक छोड़ रहे हैं और रील्स, टीवी डिबेट देखकर या एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से पूछकर अपने विचार या दृष्टिकोण बना रहे हैं. अभी तक डर यह जताया जाता था कि एआई आधारित रोबोट कहीं इतने शक्तिशाली न बन जाएं कि हम मनुष्यों को पीछे छोड़कर खुद ही फैसले लेने लगें, क्योंकि अगर ऐसा होने लगा तो मशीनें हमारे अधीन नहीं रहेंगी बल्कि हम मनुष्य उनके गुलाम बनकर रह जाएंगे. लेकिन अगर हम इसी तरह सोच-विचार तक करने में आलस करते रहे और एआई पर ही निर्भर होते गए तो एक दिन क्या खुद ही उसके गुलाम नहीं बन जाएंगे? आज यह चलन सा बन गया है कि सोशल मीडिया पर हमें कुछ भी संवेदनशील सामग्री दिखी तो हम बिना कुछ सोचे-विचारे तत्काल उसे विभिन्न ग्रुपों में फारवर्ड कर देते हैं. अफवाहें पहले भी फैलती थीं लेकिन सोशल मीडिया ने इस काम को इतना आसान बना दिया है कि कभी-कभी तो यह तय करना ही मुश्किल हो जाता है कि हम अफवाहों के युग में जी रहे हैं या हकीकत के! चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ दिनों बाद जब उन अफवाहों का खंडन आता है या हमें हकीकत पता चलती ह...