सकारात्मक शक्तियां क्यों नहीं कर पातीं गठबंधन !
पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब और तुर्किये के साथ मिलकर मक्का पैक्ट किए जाने की खबर अभी पुरानी भी नहीं पड़ी है कि पाक ने इंडोनेशिया, तुर्किये और कतर के साथ मिल ‘बद्र करार’ कर एक और सैन्य गठबंधन बना लिया है. हालांकि इसमें कोई नई बात नहीं है, दुनिया में इस तरह के सैकड़ों गठबंधन हैं. नाटो के कारण तो रूस का पिछले साढ़े चार वर्षों से यूक्रेन के साथ युद्ध जारी है. पिछली सदी में अमेरिका और रूस के नेतृत्व वाले ऐसे गठबंधनों के कारण ही लंबा शीतयुद्ध चला था. जिस तरह अकेले व्यक्ति की तुलना में व्यक्तियों का समूह ज्यादा काम कर पाता है, उसी तरह अकेले देश की तुलना में देशों के गठबंधन से फायदा होता है. लेकिन जिस तरह हम अपनी सुरक्षा या आर्थिक फायदे के लिए गठबंधन करते हैं, वैसे ही नैतिक विकास के लिए कोई गठबंधन क्यों नहीं करते? गठबंधन के जरिये हम एक-दूसरे से नई-नई चीजें सीखते या उनका आदान-प्रदान करते हैं. सवाल यह है कि हम अपने स्वार्थ या नकारात्मक चीजों के लिए तो बहुत जल्दी गठबंधन कर लेते हैं लेकिन परमार्थ या सकारात्मक चीजों के लिए गठजोड़ बनाने की उत्सुकता क्यों नहीं दिखा पाते? निंदा रस...