Posts

हम मानव, जग में सर्वश्रेष्ठ हैं; या फिर सबसे बदतर हैं ?

Image
 पिछले दिनों स्पेन के तटीय शहर सेउटा की तस्वीरें अखबारों में छपीं, जहां अफ्रीकी देश मोरक्को से करीब 60 हजार लोगों ने समुद्र में पांच किमी तक तैरकर घुसपेैठ की. इस दौरान समंदर में डूबने और भगदड़ में अनेक लोगों की मौत भी हो गई. बेहतर जीवन की तलाश में पलायन की यह घटना कोई अपवाद नहीं है बल्कि दुनियाभर में इस तरह के दृश्य देखने को मिल रहे हैं. अमेरिका में तो डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव जीतने का एक बड़ा कारण ही यह था कि उन्होंने मैक्सिको से आने वाले घुसपैठियों को रोकने के लिए दो हजार मील लंबी सीमा पर दीवार बनवाने का वादा किया था. कई साल पहले समुद्र किनारे औंधे पड़े एलन कुर्दी नामक बच्चे के शव ने शरणार्थियों के संकट की भयावहता के बारे में पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था. म्यांमार से भगाए गए रोहिंग्या शरण पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विश्व में मजबूरीवश विस्थापित होने वालों और आश्रय की तलाश में दर-दर भटकने वालों की संख्या 12.3 करोड़ से भी अधिक है.  माना जाता है कि मनुष्य दुनिया का सबसे बुद्धिमान प्राणी है. लेकिन जिस प्रजाति के करोड़ों लोगों को आश्रय तक क...

सुख फल में नहीं, परिश्रम में

मैं बिना भूख के खाता था जब स्वाद नहीं छप्पन भोगों में आता था इसलिये खूब मेहनत करके पहले मैं अपनी भूख जगाया करता हूं रूखा-सूखा खाना भी फिर छप्पन भोगों सा लगता है। वेतन जब लेता था अग्रिम बदले में करना काम बाद में बेहद बोझिल लगता था अब काम महीने भर करना उम्मीद बंधाये रखता है तनख्वाह अंत में बेहद खुशियां देती है। ईश्वर से भी मैं यही प्रार्थना करता हूं मेहनत का फल देना या चाहे मत देना पर बिना किये मेहनत कोई फल मत देना फल नहीं मिलेगा मेहनत का तो दाता का सुख पाऊंगा खैरात मगर लेकर याचक बन जाऊंगा! रचनाकाल : 29 जुलाई 2026

उधार की सोच कहीं कुंद तो नहीं कर डालेगी हमारा दिमाग !

Image
 हाल ही में सामने आई यह खबर बेहद चौंकाने वाली है कि आज के डिजिटल युग में लोग खुद सोचना तक छोड़ रहे हैं और रील्स, टीवी डिबेट देखकर या एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से पूछकर अपने विचार या दृष्टिकोण बना रहे हैं. अभी तक डर यह जताया जाता था कि एआई आधारित रोबोट कहीं इतने शक्तिशाली न बन जाएं कि हम मनुष्यों को पीछे छोड़कर खुद ही फैसले लेने लगें, क्योंकि अगर ऐसा होने लगा तो मशीनें हमारे अधीन नहीं रहेंगी बल्कि हम मनुष्य उनके गुलाम बनकर रह जाएंगे. लेकिन अगर हम इसी तरह सोच-विचार तक करने में आलस करते रहे और एआई पर ही निर्भर होते गए तो एक दिन क्या खुद ही उसके गुलाम नहीं बन जाएंगे? आज यह चलन सा बन गया है कि सोशल मीडिया पर हमें कुछ भी संवेदनशील सामग्री दिखी तो हम बिना कुछ सोचे-विचारे तत्काल उसे विभिन्न ग्रुपों में फारवर्ड कर देते हैं. अफवाहें पहले भी फैलती थीं लेकिन सोशल मीडिया ने इस काम को इतना आसान बना दिया है कि कभी-कभी तो यह तय करना ही मुश्किल हो जाता है कि हम अफवाहों के युग में जी रहे हैं या हकीकत के! चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ दिनों बाद जब उन अफवाहों का खंडन आता है या हमें हकीकत पता चलती ह...

सत्याग्रह में नहीं हारता कोई, हिंसा नहीं जीतने देती है !

 लोकतंत्र में जनता ही सरकार चुनती है लेकिन कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि जनता को अपनी उसी सरकार के खिलाफ आंदोलन करना पड़ता है. अक्सर होता यह है कि सरकार ऐसे आंदोलनों को बल प्रयोग के जरिये कुचलने की कोशिश करती है और आंदोलनकारी सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ व सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा के जरिये अपनी मांगें मनवाने की कोशिश करते हैं. नतीजतन दोनों पक्षों का नुकसान होता है. इसीलिए करीब एक शताब्दी पहले महात्मा गांधी ने अहिंसक सत्याग्रह का मार्ग दिखाया था, जिसमें दोनों पक्षों की जीत होती है. आज भी जो उस मार्ग का आश्रय लेता है वह घाटे में नहीं रहता, फिर भी ऐसा क्यों होता है कि हमें हिंसा और तोड़फोड़ का आश्रय लेना ही सबसे आसान लगता है?   हाल ही में काॅकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान कुछ युवा गांधीजी के मार्ग पर चलते दिखे. मीडिया माध्यमों ने दिखाया कि नागपुर के एक युवा को सुरक्षा बल के जवान लाठियों से पीट रहे थे और वह युवा कोई प्रतिरोध करने के बजाय चिल्ला रहा था कि मारो सर, मारो, और मारो मुझे... और अचानक ही लाठियां थम गईं. एक महिला सुरक्षा कर्मी युवक को बचाते...

आप ठगे सुख होत है...

धन चोरी करने, रिश्वत लेने वालों को जो मिलता है मेहनत करते जो, कई गुना वे अधिक कमाया करते हैं जो नकल किया करते वे पास भले ही हो जायें, लेकिन मेरिट में तो पढ़ने वाले बच्चे ही आया करते हैं। जो ठगते किसी और को, थोड़ी देर भले ही खुश हो लें नुकसान उठाकर भी लेकिन, रह पाने में ईमानदार जो सुख मिलता है अतुलनीय मन ही मन में बेईमानी करने वाले महसूस नहीं कर सकते हैं। हम तुच्छ लाभ की खातिर नीचे गिरते हैं क्षमता थी लेकिन उठने की जितनी ऊपर हम उसे गंवाने की क्षति का अहसास कभी कर पाए तो क्या माफ स्वयं को किसी तरह कर सकते हैं? रचनाकाल : 21 जुलाई 2026

दानवीरों के साथ-साथ कैसे बढ़ती जा रही है दान-चोरों की संख्या ?

Image
 अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी की घटना उजागर होने के बाद, देश के अलग-अलग हिस्सों से इसी तरह की चोरी की ढेरों घटनाएं सामने आने लगी हैं. हिंदू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक बद्रीनाथ धाम में चोरी कांड की जांच एसआईटी कर रही है. वैष्णो देवी मंदिर में भी इसी तरह के गबन का मामला कोर्ट में पहुंच गया है, आरोप है कि मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित की गई करीब 20 टन चांदी, जिसकी कीमत 550 करोड़ रु. होनी चाहिए, में मिलावट की गई या उसे बदल दिया गया और टकसाल में गलाए जाने पर वह मात्र 30 करोड़ की निकली. गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर में दान की चोरी का सीसीटीवी फुटेज वायरल हो रहा है और इस मामले में मंदिर से जुड़े तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. छत्तीसगढ़ के कांकेर में पांच मंदिरों और मध्यप्रदेश के अमरकंटक में व नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर में भी दान और चढ़ावे में गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं.  मंदिरों में दान देने की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है. भारत में नौ लाख से अधिक पंजीकृत मंदिर हैं. अधिकांश छोटे मंदिरों के पंजीकृत रिकाॅर्ड नहीं होने के कारण स...

सहानुभूति की शक्ति

मुझसे लोगों के कष्ट न देखे जाते थे हरसम्भव कोशिश करता सुखी बनाने की इस चक्कर में पर भीतर से कमजोर लोग हो जाते थे सहृदयता मेरी उनकी खातिर निर्दयता बन जाती थी प्रतिकूल परिस्थितियों को झेल न पाते थे। इसलिये नहीं अब दु:ख उनके कम करने की कोशिश करता उनसे भी ज्यादा कष्ट स्वयं स्वेच्छा से भोगा करता हूं मेरे आगे उनके दु:ख की छोटी लकीर जब दिखती है तो सम्बल उनको मिलता है दु:ख-कष्टों को आसानी से सह पाते हैं भीतर से बनते जाते हैं मजबूत मुझे भी अपने संग मजबूत बनाते जाते हैं। रचनाकाल : 16 जुलाई 2026