दोष दिखानेवालों का आभारी होने के बजाय हम क्यों हो जाते हैं नाराज ?
लगभग छह साल पहले, हरियाणा में सिरसा जिले के गांव माधोसिंघाना में एक दुकान में गाली देकर डिस्पोजल मांगने वाले युवक की हत्या कर दी गई थी. अब उसी सिरसा और आसपास के क्षेत्र में गाली देने की लोगों की आदत छुड़ाने के लिए ‘गाली बंद घर’ नामक एक अभिनव अभियान चलाया जा रहा है. सामाजिक कार्यकर्ता और ‘सेल्फी विद डाॅटर’ फाउंडेशन के संस्थापक सुनील जागलान द्वारा शुरू की गई इस पहल से अब तक दो हजार लड़कियां जुड़ चुकी हैं. वे एक चार्ट बनाकर अपने घर के सभी सदस्यों का नाम दर्ज करती हैं और जो सदस्य दिनभर में जितनी बार गाली देता है, उसके नाम के आगे उस दिन वह आंकड़ा दर्ज करती हैं. इसका असर यह हुआ है कि इलाके में लोगों द्वारा गालियों के प्रयोग में 70 प्रतिशत तक की कमी आई है. गांव बीबीपुर के सरपंच रह चुके जागलान पिछले 12 वर्षों से यह मुहिम चला रहे हैं, जिसकी प्रशंसा ब्रिटेन का अखबार ‘द गार्जियन’ भी कर चुका है. बिना किसी जोर-जबर्दस्ती के, सिर्फ आईना दिखाकर लोगों की गाली देने की आदत छुड़ाने का यह प्रयास अद्भुत है. दरअसल कोई भी नहीं चाहता कि वह बदसूरत नजर आए. दिक्कत यह है कि हमें खुद अपना चेहरा दि...