हम चाहें तो विष को अमृत कर सकते हैं, फिर उल्टा क्यों कर देते हैं !
हाल ही में देश में वैश्विक एआई उत्सव मनाया गया. भारत में एआई को लेकर जहां भारी उत्साह है, वहीं जैसा कि पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री सुनक ने कहा कि पश्चिमी देशों में घबराहट है. देश में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित हुए ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट’ समिट में एआई से जुड़े दुनियाभर के दिग्गज शामिल हुए और नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एक्सपो में शामिल सैकड़ों एआई माॅडल्स ने निर्विवाद रूप से तय कर दिया कि भविष्य एआई का ही है. इनमें महिलाओं, बच्चों, किसानों, मरीजों, दिव्यांगों- सबके लिए इतने अद्भुत प्रोजेक्ट्स बनाए गए हैं कि अगर इन्हें सचमुच जमीन पर उतारा जा सके तो सबके जीवन का कायापलट होते देर नहीं लगेगी. जरा सोचिए, कैंसर होने की चेतावनी अगर समय रहते मिल जाए तो भला कौन उसे टालने के लिए खानपान में संयम बरतना शुरू नहीं कर देगा? मिट्टी की सेहत की जांच स्मार्टफोन में मौजूद एआई कर देगा तो क्या हम खेतों को बंजर बनाना बंद नहीं कर देंगे? दिल की गड़बड़ी की पहचान अगर मोबाइल में मौजूद एआई से ही हो जाएगी तो दुनिया में हर साल करोड़ों लोग हार्टअटैक से क्यों मरेंगे? शुगर, बीपी होने के पहले ही अगर चेतावनी मि...