मनुष्येतर जीवों पर तो हमने पा लिया काबू, लेकिन खुद हो चुके हैं बेकाबू !
अभी कुछ दिन पहले ही क्लाॅड चैटबाॅट बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक के एक प्रमुख एआई प्री-ट्रेनिंग रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया कि एआई कंपनियां सुपरइंटेलिजेंस बनाने की होड़ में ‘इंसानी जिंदगियों के साथ जुआ खेल रही हैं’. जैकब का कहना है कि एआई बनाने वाले लोग खुद यह मानते हैं कि यह तकनीक इस दशक के अंत तक अर्थात अगले तीन-चार सालों में पूरी मानवता को खत्म कर सकती है. एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थात एआई से खौफ खाते हुए एआई माॅडल बनाने की रफ्तार घटाए जाने की सलाह दी है. उनकी चिंता के साथ ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन और एक्स एआई के प्रमुख एलन मस्क ने भी सहमति जताई है. यानी खतरा सुदूर भविष्य में नहीं बल्कि हमारे सिर पर ही मंडरा रहा है. जीवन को आरामदेह बनाने की अपनी निरंतर कोशिशों के चलते हम मनुष्यों की हालत शायद उस नशेड़ी की तरह हो गई है जो यह बात तो जानता है कि नशा उसके लिए हानिकारक है लेकिन लत लग जाने के कारण वह नशे के बिना रह भी नहीं पाता. परंतु अपने जीवन को आरामदेह बनाने की कोशिश तो दुनिया का हर प्राणी करता है, ...