प्रेम परिष्कृत करता है, फिर क्यों निकृष्ट बनकर ही रह जाते हैं हम !
युवाओं के आक्रोश और असंतोष को भुनाने के लिए ‘काॅकरोच पार्टी’ का गठन होने के बाद, अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ नामक एक नए प्लेटफाॅर्म का ऐलान किया है. उन्होंने युवाओं से इसे ज्वाइन करने की अपील करते हुए ‘मेक लव, नाॅट वार’ अर्थात ‘युद्ध नहीं, प्रेम करो’ का नारा दिया है. हालांकि जस्टिस काटजू की इस पार्टी का कोई औपचारिक मेनिफेस्टो या संगठन ढांचा सामने नहीं आया है लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि युद्धों की विभीषिका से जूझती दुनिया में प्रेम अब हमारे लिए शौक की चीज नहीं बल्कि अस्तित्व का सवाल बन गया है. दुनिया में कौन ऐसा इंसान होगा जो प्रेम नहीं बल्कि नफरत करना चाहता हो! लेकिन ‘इश्क’ शब्द से आज हमारे मन में जो तस्वीर बनती है, क्या वह सचमुच इतनी निर्मल है कि हर कोई बिना किसी झिझक के इस पार्टी में शामिल हो सके? हकीकत शायद यह है कि आज प्रेम को भी हमने इतना सस्ता और सड़कछाप बना दिया है कि उसी धारणा के चलते ‘इश्क करो पार्टी’ समाज में किसी गंभीर विमर्श का केंद्र बनने के बजाय मजाक का विषय बन कर रह गई है और सोशल मीडिया में उस पर मीम्स की बाढ़ आई हुई है. ...