बस इतना ही देना माता...

मैं शक्तिदायिनी माता से
मांगा करता था शक्ति
किया करता था व्रत-उपवास बहुत।

अब भी रखता उतना ही व्रत-उपवास
मगर अब नहीं मांगता शक्ति
प्रार्थना केवल इतनी करता हूं
जो भी है मेरे पास अभी
उसका कर पाऊं सदुपयोग
इतना विवेक बस दे देना।

बल कम होने से अधिक मुझे
बल के मद में अत्याचारी
बन जाने से डर लगता है।

रचनाकाल : 4 अक्टूबर 2026

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