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पैमाना

जब नहीं पास था मेरे कुछ तब जो भी मिल जाता था उसको मान अनुग्रह ईश्वर का खुश रहता था मिल गया बहुत कुछ लेकिन जब तब थोड़ा भी घट जाने पर दु:ख उसका होने लगता था जो पास बचा, आनंद न उसका मिलता था। इसलिये नहीं मैं तुलना अब अच्छे दिन से, कम अच्छे दिन की करता हूं पैमाना हरदम बुरे दिनों का रखता हूं छोटे-मोटे दु:ख-कष्टों में सबसे खराब दिन याद कर लिया करता हूं उसकी तुलना में कम खराब दिन भी अब अच्छे लगते हैं। (रचनाकाल : 2-3 मई 2026)