मशविरा
इतने नजदीक न आ, दूर रहा कर मुझसे
तू मुझे अपनी सगी बेटी जैसी प्यारी है
बात किस-किस को मगर अपनी ये समझाऊंगा
आड़ लेकर मेरी क्या लोग न कर जायेंगे
देंगे जब मेरी मिसालें, मैं कहां जाऊंगा
एक जीवन में कई बार न मर जाऊंगा!
बचपना तेरा मेरे मन को बहुत भाता है
देख मासूमियत बचपन मुझे याद आता है
किंतु सीधा है नहीं आज जमाना इतना
भेड़िये घूम रहे भेष बदल कितने ही
हो गई है तू बड़ी, थोड़ी समझदारी ला
इतने नजदीक न आ, दूर रहा कर मुझसे।
तू मुझे अपनी सगी बेटी जैसी प्यारी है
बात किस-किस को मगर अपनी ये समझाऊंगा
आड़ लेकर मेरी क्या लोग न कर जायेंगे
देंगे जब मेरी मिसालें, मैं कहां जाऊंगा
एक जीवन में कई बार न मर जाऊंगा!
बचपना तेरा मेरे मन को बहुत भाता है
देख मासूमियत बचपन मुझे याद आता है
किंतु सीधा है नहीं आज जमाना इतना
भेड़िये घूम रहे भेष बदल कितने ही
हो गई है तू बड़ी, थोड़ी समझदारी ला
इतने नजदीक न आ, दूर रहा कर मुझसे।
रचनाकाल : 27 मई 2026
Comments
Post a Comment