नए साल की नई भोर क्यों अलसाई-सी लगती है ?
नववर्ष की पूर्वसंध्या नजदीक आ गई है. चंद घंटों बाद ही नया साल दस्तक दे देगा, जिसके स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं. होटल, पब, रेस्तरां- सब बुक हो चुके हैं और आधी रात को बारह बजते ही सेलिब्रेशन का सैलाब उमड़ पड़ेगा. लेकिन ‘नए साल की नई सुबह’ का क्या होगा? कितने लोग मुंह-अंधेरे उठकर उगते सूरज को देख पाएंगे? हाल ही में बेंगलुरु में एमडी ड्रग्स की तीन फैक्ट्रियां पकड़े जाने की खबर सामने आई और 55 करोड़ रुपए का ड्रग्स बरामद किया गया. इसके एक दिन पहले 26 दिसंबर को मुंबई में 35 करोड़ की ड्रग्स पकड़े जाने की खबर थी. यह शोध का विषय हो सकता है कि नववर्ष की पूर्वसंध्या पर हम में से अधिकांश लोग किस तरह से नए साल के आगमन का जश्न मनाते हैं, लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि शराब की बिक्री इस अवसर पर अन्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है. आज के उपभोक्तावादी युग में उत्सव का अर्थ हम भले ही मौज-मस्ती समझते हों, लेकिन हमारे पूर्वजों की नजर में ये खुद को निर्मल और पवित्र बनाने के अवसर होते थे. भारतीय संस्कृति में व्रत-उपवास का अनन्य महत्व है और प्रकृति से सामंजस्य बिठाकर जीवन जीने को प्र...