अच्छाई में कमी
कुछ लोगों को बुरा समझकर
मैंने उनकी निंदा की
पर अच्छे निकले जब वे तो
मैं लज्जा से गड़ गया
स्वयं की नजरों में गिर गया
बुराई शायद मेरे भीतर थी!
इसलिये नहीं अब कभी
किसी को करता हूं बदनाम
कि मेरी अगर धारणा
साबित कभी गलत हुई तो
क्या नहीं डूब कर मर जाऊंगा
चुल्लू भर पानी में ही!
सच तो यह है कोई भी इतना बुरा नहीं
अच्छाई का प्रतिदान बुराई से जो दे
यदि हमको ऐसा लगता है
हम तो हरदम अच्छा करते
पर बुरा हमारे साथ हमेशा होता है
तो कमी हमारी अच्छाई में शायद है!
रचनाकाल : 6 सितंबर 2026
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