क्रिया-प्रतिक्रिया


है नियम प्रकृति का ही शायद 
प्रत्येक क्रिया की होती है प्रतिक्रिया
कि करता है जब कोई बुरा किसी का
बुरा वक्त फिर उसका भी फिर आता है
फिर क्यों विश्वास हमारा यह डिग जाता है
अच्छाई का बदला न हमें मिल पायेगा!

अच्छाई के बदले में भी
यदि कोई करता बुरा
दोष ईश्वर को देने लगते हम
क्यों नहीं झांकते हैं भीतर 
करने को आत्मनिरीक्षण यह
अच्छाई में तो कहीं हमारे खोट नहीं!

रचनाकाल  : 5-6 सितंबर 2026

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