प्रेम में परिष्कार
किस्मत से किसी को दुनिया में
कोई चाहने वाला मिलता है
तुमको भी अगर कोई मिल जाये
तो गंगाजल के जैसा अपने
मन को निर्मल कर लेना।
यह आग नहीं कोई साधारण
कर लेता है जो अग्निस्नान
कुंदन की तरह दमकता है
तुम भी सब कचरा जला
स्वयं को सोना खरा बना लेना।
तुमको शायद अहसास न हो
क्या वस्तु तुम्हें अनमोल मिली
तुम मोल चुका न सकोगे कभी
देकर समाज को अधिकाधिक
हो सके तो ब्याज चुका देना।
रचनाकाल : 2-3 जून 2026
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