दुश्मन मेरे जैसा

दुश्मन की नजरों से खुद को देखा जब तो
रह गया स्तब्ध यह देख
कि चेहरा मेरा भी दुश्मन जैसा
हू-ब-हू दिखाई पड़ता है!

दुश्मन में जितनी मुझे बुराई दिखती है
उसको भी मेरे भीतर उतनी दिखती है
मैं खुद को जितना अच्छा माना करता हूं
वह भी खुद को वैसा ही माना करता है!

तो जितना मैं निर्दयी समझता था उसको
क्या उतनी ही निर्दयता मेरे भीतर है
मन का काला जितना उसको माना करता
क्या मैं भी भीतर से उतना ही काला हूं!

जब से देखा है अक्स स्वयं का दुश्मन में
मैं कांप गया हूं मन ही मन गहराई तक
अब वह भी मुझको अपने जैसा लगता है
हे ईश्वर, मेरे दुश्मन की रक्षा करना!


रचनाकाल : 15 अप्रैल 2026


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