रफ्तार
यूं तो बदलाव हमेशा ही हुआ करते थे
जिंदगी एक जगह पर न ठिठकती थी कभी
किंतु होने में नया पीढ़ियां लग जाती थीं
द्वंद्व चलता था नये और पुराने में ही।
हो गई है मगर रफ्तार तेज अब इतनी
कुछ दिनों में ही बदल जाती है सारी दुनिया
खुद की नजरों में पराये हुए हम जाते हैं
अपने ही आप को पहचान नहीं पाते हैं!
जिंदगी पहले बहुत सुस्त लगा करती थी
गति बढ़ी जब तो हुआ तन-मन रोमांचित, पर
अब डराने ही लगी है बहुत भीषण रफ्तार
हादसों का सदा अंदेशा बना रहता है!
रचनाकाल : 31 मार्च 2026
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