...सदा मगर मन रहना जी
पहले मुझको कुछ बातों या कुछ लोगों पर
गुस्सा आ जाया करता था
मैं बातें करके बंद उन्हें
गुस्सा दिखलाया करता था
पर लगा बाद में, जीवन चार दिनों का है
गुस्से में ही यदि काट दिया
क्या खाक इसे जी पाऊंगा!
इसलिये जहां जो जैसा है
वैसा ही कर स्वीकार उसे
खुश रहने की कोशिश करता हर हालत में
डर लगता है बातें मनवाने की अपनी
जिद में यदि सबकुछ तहस-नहस कर डालूंगा
तो मुझमें और डोनाल्ड ट्रम्प में
फर्क कहां रह जायेगा!
रचनाकाल : 4अप्रैल 2026
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