असली जीत

जब गाली कोई देता है
बदले में चुप रह जाता हूं
तब कायर मुझको लोग समझने लगते हैं।
पर मुझे पता है गाली मैं भी दे दूंगा
तो जीत सामने वाले की हो जायेगी
मैं भी उसके जैसा ही
कीचड़ में लथपथ हो जाऊंगा
इसलिये कभी जब कोई गुस्सा होता है
मैं बदले में देकर मीठी मुस्कान
आग में पानी डाला करता हूं
जो अपने गुस्से की ज्वाला में
मुझे जलाने वाला था
वह आग बुझाते ही मेरे
शर्मिंदा होने लगता है।
धुलने लगता जब मैल
साफ-सुथरा वह होने लगता है
तब मुझको अपनी जीत दिखाई पड़ती है।
 

(रचनाकाल : 7-8 मार्च 2026)

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