पुल बनने की ख्वाहिश

मैं अक्सर पुल बनने की कोशिश करता हूं
कुछ लोग बहुत आगे हो जाते
कुछ पीछे रह जाते हैं
तो मैं दोनों के बीच, राह पर चलता हूं।
यह सच है आगे-पीछे जो भी हैं
समूह में अपने-अपने चलते हैं
मैं दोनों को जोड़े रखने के चक्कर में
निपट अकेला ही अक्सर रह जाता हूं
पर मुझे पता है टूट गया संबंध अगर
तो दुनिया यह दो हिस्सों में बंट जायेगी
दोनों ही एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन जायेंगे
मिलकर दोनों कर सकते हैं अद्‌भुत विकास
पर अलग-अलग हो लड़-भिड़कर मर जायेंगे
इसलिये क्षीण ही सही मगर
संबंध बीच दोनों के कायम रखता हूं
मैं नहीं तोड़ने में रखता विश्वास
जोड़ना मुझको अच्छा लगता है।

(रचनाकाल : 26-27 फरवरी 2026)

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