जंगबाजों के प्रति

निर्दोष हमारी होली थी
फूलों से रंग बनाकर खेला करते थे
तुमने तो लहू मिला डाला
क्यों खूनी खेल रचा डाला!

दीवाली में फोड़ा करते थे
हम बच्चे तो सुतली बम
तुमने एटम बम बना
उसे बदनाम किया
बंदूक खिलौने वाली में भी
असली बंदूकों जैसा डर थोप दिया!

हम तो भाई-चारा फैलाया करते हैं
दुश्मन को भी होली पर गले लगाते हैं
तुम क्यों गुलाल को लहूलुहान बनाते हो
पावन त्यौहारों पर क्यों दाग लगाते हो!
hemdhar.blogspot.com
रचनाकाल : 2 मार्च 2026

Comments

Popular posts from this blog

गूंगे का गुड़

सम्मान

उल्लास उधारी का