सफेदपोश आतंकवादी

अभी-अभी सूझा है मन में कुटिल विचार
क्यों नहीं सौंप देते हम
आतंकवादियों को देश की सत्ता!
लड़ते हैं जो आम लोगों के नाम पर
उनको भी तो मिले मौका
आम लोगों का भला करने का!

परसों आई थी खबर
इस साल बारह करोड़ का जला कपास
जला या जला दिया गया!
व्यंग्य से पूछा था शाहिद जी ने
पेज चेक करते हुए
फिर बताया उन्होंने ही
कि छिपाने के लिए
दो-चार करोड़ का घोटाला
जला दी जाती है
दस-बारह करोड़ की कपास.
अभी हफ्ता भी तो नहीं बीता
पीएफ घोटाले के मुख्य आरोपी की
संदिग्ध मौत का
बत्तीस जजों के नाम जुड़े हैं घोटाले में
शामिल हैं जिसमें हाईकोर्ट
और सुप्रीम कोर्ट के जज भी.
पखवाड़ा भी नहीं बीता
विधानसभा का चुनाव हुए
जब नक्सलग्रस्त गढ़चिरोली में
मतदान केंद्र पर
ग्रामीणों को लाया गया हाँक कर
पुलिस ने डलवाए वोट
बंदूक की नोंक पर
सर्वाधिक मतदान हुआ वहाँ.
बेवकूफी पर यह की पुलिस ने
कि ग्रामीणों के साथ-साथ
पीट दिया पत्रकारों को भी.
गुस्साए पत्रकारों ने
उछाल दिया मामला
छाप दी खबर.
पर बीत चुका है पखवाड़ा
कहाँ हुई कोई कार्रवाई!

इसीलिए सोचता हूँ
देना चाहिए एक बार
असली आतंकवादियों को भी मौका
जैसे देते हैं हम
कांग्रेस, भाजपा या तीसरा मोर्चा को
इन सफेदपोश आतंकवादियों से
ज्यादा बुरा क्या कर लेंगे वे
पता तो चले उन्हें
कि सत्ता चलाना हँसी-खेल नहीं
क्या यही लालच नहीं निगल गया
बंगाल के कम्युनिस्टों को!

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