दु:ख-कष्टों का सुख


तकलीफों से जब डरता था
जीवन आसान बनाने की
कोशिश में हरदम रहता था
पर सुख जितना ही मिलता था
उतना ही भीतर पथराता कुछ लगता था
पहले के दुष्कर जीवन की
यादें अद्भुत सी लगती थीं।

इसलिये नहीं कठिनाई को
अब पीठ दिखाया करता हूं
कितनी भी विकट परिस्थिति हो
सामना सभी का करता हूं
मजबूरी में सहने पर जो
दु:ख-कष्ट भयानक लगते थे
अब स्वेच्छा से सह कर उनको खुश रहता हूं
लोगों को जैसे सुखद
पुराने दिन की स्मृतियां लगती हैं
मुझको वैसे ही सपनीला
अब वर्तमान भी लगता है।

रचनाकाल : 21 नवंबर 2025

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