उम्मीद बांधते साल

मैं नये साल से उम्मीदें
हर बार लगाया करता था
कुछ चमत्कार हो जायेगा
सबकुछ अपने ही आप ठीक हो जायेगा
जाने क्यों ऐसा लगता था।
पर स्तब्ध रह गया जब जाना यह सच्चाई
हर साल नया उम्मीदें मुझसे रखता है
कुछ चमत्कार कर जाऊंगा
अपने अच्छे-अच्छे कामों से
नये साल का नाम अमर कर जाऊंगा
इस इंतजार में रहता है!
तब से स्वागत कर नये साल का
आश्वासन यह देता हूं
होने दूंगा न निराश उसे
लगने दूंगा न कलंक कोई
कुछ काम करूंगा ऐसा जिससे
याद रखेगी दुनिया उसको यह कहकर
वह साल बहुत ही अद्‌भुत था!

रचनाकाल : 30 दिसंबर 2025

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