लिखते रहना होगा

रुकने का यह समय नहीं
कसनी होगी कमर
और भी दृढ़ता से
क्या तुम जानते नहीं
कि जितना ही घना होता है अंधेरा
उतनी ही बढ़ जाती है-
दीपक की जिम्मेदारी!
ठीक है कि तुम्हारी कल्पना में भी नहीं था
कि इस दिशा से हो सकता है हमला
गढ़ में घुस आए हैं वे
घर के भीतर से कर रहे प्रहार
पढ़ने-लिखने को बना दिया है उन्होंने
सामाजिक उपहास की वस्तु
इसीलिए तुम्हारे बाहर बैठ कर लिखने पर
घर वाले महसूस करते हैं शर्म
अगर नहीं हैं पत्नी-बच्चे तुम्हारी तरह मजबूत
तो यह उनका दोष तो नहीं!
कोई बात नहीं  
चोरी-छिपे ही सही
घर के भीतर घुटन में बैठ कर ही सही
लिखते जाना है तुम्हें अनवरत.
क्या तुम नहीं जानते
कि कितना बड़ा है तुम्हारा अपराध!
प्रवाह के विरुद्ध चलने की
उसकी दिशा गलत बताने की
जितनी भी दें वे सजा
कम है.
रहना होगा तुम्हें तैयार
जेल में बैठकर लिखने को भी.
जिस दिन तुम छोड़ दोगे लिखना
बंद हो जाएगा तारों का टिमटिमाना
अंधेरे को मान लिया जाएगा
सार्वभौमिक सत्य
नहीं जान पाएगा कोई
कि क्या होता है प्रकाश.
इसलिए निकलने तक दिन
तुम्हें टिमटिमाते रहना होगा
लिखते रहना होगा.

Comments

Popular posts from this blog

गूंगे का गुड़

सम्मान

उल्लास उधारी का