अंधाधुंध दौड़ से बढ़ती यांत्रिकता और कुंद होती प्रतिभा
वैसे तो बहुत सारी चीजें डमी होती हैं लेकिन क्या आपने कभी सुना कि स्कूल भी डमी होते हैं? और वह भी सीबीएसई से सम्बद्ध स्कूल! लेकिन सीबीएसई अर्थात केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हालिया चेतावनी बताती है कि वे होते हैं और बोर्ड ने कहा है कि डमी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को परीक्षा से वंचित किया जा सकता है. डमी अर्थात ऐसे स्कूल जहां छात्र प्रवेश तो लेते हैं लेकिन क्लास अटैंड नहीं करते. ऐसे स्कूलों का कोचिंग संस्थानों से टाय-अप होता है, जिससे स्कूलों को अपनी फीस मिल जाती है, और छात्रों को कोचिंग में पढ़ने के लिए पूरा समय. चूंकि सिलेबस एक ही होता है, इसलिए छात्र स्कूल गए बिना ही बारहवीं की परीक्षा भी पास कर लेते हैं. लेकिन आज के जमाने में, जब साध्य को ही सबकुछ माना जाता है, छात्रों द्वारा परीक्षा में अच्छे नंबर लाने के बावजूद सीबीएसई उन्हें ‘चेतावनी’ क्यों दे रहा है? एक और महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि छात्रों को कक्षा में आने के लिए ‘मजबूर’ करने के बजाय उन्हें इसके लिए ‘आकर्षित’ करना क्या ज्यादा सही तरीका नहीं होगा? सीबीएसई ने अपनी चेतावनी के कारणों का खुलासा भले न किया हो, ल...