ढोंगी बाबा से जब नेता मिलें, ‘करेला नीम चढ़ा’ हो जाता है !
पुरानी पीढ़ी के लोगों ने अपने बचपन में मेलों-ठेलों के दौरान अक्सर ही किसी मदारी और जादू जानने वाले के बीच का खेल देखा होगा. दोनों ही अपनी पूरी ताकत से एक-दूसरे पर मंत्रों की शक्ति से प्रहार करते थे. लगभग आधे-पौन घंटे तक जोर-आजमाइश का यह खेल चलता रहता था और अंत में दर्शकों की तरफ से जो पैैसा मिलता, वह या तो दोनों के बीच बराबर बंट जाता या अधिक मार सहने और हारने का नाटक करने वाला अधिक पैसा लेता था. हमारे गांव के स्कूल में मास्टरी करने वाला व्यक्ति इस खेल में हमेशा मदारी से जीत जाता और दर्शकों से मिलने वाले पैसे में कोई हिस्सा भी नहीं लेता था, क्योंकि बदले में लोगों के बीच उसकी अच्छी-खासी साख जम जाती और इतवार-मंगलवार को सुबह-सुबह टोना झारने (उतारने) का उसका व्यवसाय दिनोंदिन चमकता जाता था. बहुत दिनों तक हम बच्चे उनके इस नाटक को सच मानते रहे थे, लेकिन एक बार दूसरे गांव में मेले के दौरान जब जादू जानने वाले एक व्यक्ति ने मदारी के सामने हारने का नाटक किया और बदले में मिलने वाले पैसों में आधा हिस्सा बंटा लिया तो अनायास ही जैसे सारा तिलिस्म टूट गया था. पिछले दिनों कथित ज्योतिषी और पाखं...